"मध्यकालीन भारत में महिला श्रम का इतिहास: कृषि, हस्तशिल्प एवं घरेलू उद्योगों का अध्ययन"
DOI:
https://doi.org/10.64751/47zjfz34Abstract
महिलाओं के श्रम और आर्थिक योगदान का मध्यकालीन भारत के इतिहास में अध्ययन प्रायः राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संदर्भ में किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं के श्रम और आर्थिक योगदान को उचित महत्व नहीं मिल सका। इस शोध-पत्र का उद्देश्य मध्यकालीन भारत में महिलाओं के श्रम की प्रकृति का ऐतिहासिक विश्लेषण करना है। साथ ही कृषि, हस्तशिल्प और घरेलू उद्योगों में उनकी भूमिका का भी अध्ययन किया गया है। अध्ययन में ऐतिहासिक-विश्लेषणात्मक पद्धति का उपयोग किया गया है तथा उपलब्ध प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों का भी सहारा लिया गया है।
अध्ययन से ज्ञात होता है कि कृषि, पशुपालन, सूत काताई, वस्त्र निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण तथा हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में महिलाएँ अत्यंत सक्रिय रूप से कार्य करती थीं। उनके कार्यों ने पारिवारिक आय, स्थानीय बाजार तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यद्यपि उनका अधिकांश कार्य अवैतनिक या अप्रत्यक्ष था, फिर भी वह उत्पादन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग था। पुरुष-केंद्रित इतिहासलेखन के कारण उनके वित्तीय योगदान का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया गया। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि महिला श्रम के विश्लेषण के बिना मध्यकालीन भारत के आर्थिक इतिहास को समग्र रूप से समझना संभव नहीं है।
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