कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी भाषा: हिंदी लेखन, अनुवाद एवं साहित्यिक सृजन पर तकनीकी परिवर्तन का प्रभाव

Authors

  • डॉ कमलेश देवी Author

DOI:

https://doi.org/10.64751/kac7vj04

Abstract

इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने मानव जीवन के हर क्षेत्र में एक प्रमुख तकनीक के रूप में अपनी जगह बना ली है। इसमें भाषा, साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, प्रशासन, शोध, संचार और ज्ञान-विनिमय जैसे विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं। AI के बढ़ते उपयोग ने पारंपरिक भाषाई प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं, और हिंदी भाषा भी इससे अछूती नहीं रही है।  हिंदी लेखन, वर्तनी सुधार, व्याकरण सुधार, पाठ संपादन, मशीन अनुवाद, वाक् पहचान, वाक् संलेखन, पाठ सारांशण, साहित्यिक विश्लेषण और रचनात्मक लेखन जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत में विकसित नए भाषा तकनीकी संसाधनों ने हिंदी को डिजिटल प्लेटफार्मों पर अधिक व्यापक, सहज और उपयोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।य भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकसित बहुभाषी संसाधनों में हिंदी को प्रमुख स्थान प्राप्त है और बड़े पैमाने पर समानांतर भाषा-संग्रह तथा अनुवाद संसाधन तैयार किए जा रहे हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण हिंदी भाषा और साहित्य में उत्पन्न हो रहे परिवर्तनों का समग्र एवं आलोचनात्मक अध्ययन करना है। शोध में हिंदी लेखन, यंत्र अनुवाद और साहित्यिक सृजन के तीन महत्वपूर्ण आयामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक और तुलनात्मक विधियों का उपयोग किया गया है। अध्ययन के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने हिंदी लेखन को अधिक त्वरित, सुविधाजनक और संसाधनयुक्त बना दिया है। फिर भी, भाषाई शुद्धता, संदर्भ का अर्थ, सांस्कृतिक आह्वान, मुहावरे, स्थानीय अनुभव और साहित्यिक संवेदनाओं को बनाए रखने के लिए मानव संपादन की आवश्यकता बनी हुई है। यंत्र अनुवाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय उन्नति हुई है, खासकर भारतीय भाषाओं के बीच सीधे अनुवाद में। हालांकि, साहित्यिक अनुवाद में भाव, शैली, सांस्कृतिक संदर्भ और सौंदर्यात्मक अर्थ को संरक्षित रखना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। साहित्यिक रचनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने कविता, कहानी, निबंध, संवाद और कथानक के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।यिक विश्लेषण के नए अवसर उत्पन्न किए हैं। इसके बावजूद साहित्य की मूलभूत विशेषताओं जैसे मानवीय अनुभव, संवेदना, जीवन-संघर्ष, सांस्कृतिक स्मृति और वैयक्तिक रचनात्मक चेतना को पूर्णतः गणनात्मक प्रणाली से प्रतिस्थापित करना संभव नहीं माना जा सकता। अतः हिंदी भाषा और साहित्य के भविष्य के लिए मानव तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहयोगात्मक संबंध की आवश्यकता अधिक महत्वपूर्ण दिखाई देती है। अध्ययन का निष्कर्ष है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता हिंदी की प्रतिस्पर्धी शक्ति नहीं, बल्कि उचित मानवीय नियंत्रण और नैतिक उपयोग के अंतर्गत हिंदी के विकास, संरक्षण, प्रसार और वैश्विक विस्तार का प्रभावी साधन बन सकती है।

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Published

2026-08-26

How to Cite

डॉ कमलेश देवी. (2026). कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हिंदी भाषा: हिंदी लेखन, अनुवाद एवं साहित्यिक सृजन पर तकनीकी परिवर्तन का प्रभाव . International Journal of Economic Social Science and Management LAW, 7(3), 600-623. https://doi.org/10.64751/kac7vj04