डिजिटल दुनिया और धार्मिक पूर्वग्रह

Authors

  • प्रा. राजकुमार एन. देशकर Author

DOI:

https://doi.org/10.64751/5sa3b422

Abstract

21वीं सदी को डिजिटल युग कहा जाता है। आज इंटरनेट, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्टफोन ने मानव जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। सूचना का प्रवाह पहले से कहीं अधिक तेज़, व्यापक और सुलभ हो गया है। हम कुछ ही सेकंड में दुनिया के किसी भी कोने की खबरें प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन इस डिजिटल क्रांति ने ज्ञान और संवाद के नए द्वार खोले हैं, उसी ने समाज में नए प्रकार के संकट भी पैदा किए हैं। इन संकटों में से एक महत्वपूर्ण समस्या है धार्मिक पूर्वग्रह (Religious Bias) का प्रसार।

धार्मिक पूर्वग्रह वह मानसिकता है जिसमें व्यक्ति या समूह किसी अन्य धर्म के प्रति नकारात्मक धारणाएँ, रूढ़ियाँ या शत्रुता रखता है। डिजिटल दुनिया में यह पूर्वग्रह कई गुना तेजी से फैलता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, यूट्यूब चैनल, व्हाट्सएप समूह और अन्य ऑनलाइन मंचों के माध्यम से धार्मिक विचारधाराएँ और कभी-कभी कट्टरपंथी सोच भी बड़े पैमाने पर फैलती है।

इस लेख में हम समझेंगे कि डिजिटल दुनिया धार्मिक पूर्वग्रह को कैसे प्रभावित करती है, इसके कारण क्या हैं, इसके सामाजिक प्रभाव क्या हैं और इससे निपटने के उपाय क्या हो सकते है|

     

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Published

2026-03-19

How to Cite

प्रा. राजकुमार एन. देशकर. (2026). डिजिटल दुनिया और धार्मिक पूर्वग्रह. International Journal of Economic Social Science and Management LAW, 7(1(1), 1426-1430. https://doi.org/10.64751/5sa3b422